मां शिप्रा का पूजन कर तीर्थ पुरोहितों ने की धर्मसभा
शिप्रा आरती विवाद पर देशभर के तीर्थ पुरोहित एकजुट, महासभा ने दी आंदोलन की चेतावनी, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा राणोजी की छतरी के घाट पर आरती कराए जाने का विरोध, परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोप लगाया
तीर्थाटन को पर्यटन ना बनाएं-स्वामी शैलेशानंद गिरि महाराज महामंडलेश्वर
उज्जैन, मां शिप्रा की आरती को लेकर चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा (रजिस्टर्ड संपूर्ण भारत) ने महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से राणोजी की छतरी के घाट पर आरती कराए जाने को तीर्थ पुरोहितों की पारंपरिक व्यवस्था में हस्तक्षेप बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासभा का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान से जुड़े कार्यों को प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत संचालित करना उचित नहीं है।
महासभा के प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले पांच दशकों में संगठन ने सनातन धर्म एवं तीर्थ परंपराओं से जुड़े अनेक विषयों पर संघर्ष किया है तथा न्यायालयों से भी कई मामलों में सफलता प्राप्त की है। महासभा का दावा है कि देशभर के तीर्थों से जुड़े पुरोहितों के हितों और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए वह लगातार प्रयासरत रही है। परंपरा और अधिकारों की रक्षा का मुद्दा महासभा के अनुसार पंडा पुरोहित परंपरा में कई पीढ़ियों का संघर्ष और योगदान रहा है।
इसलिए स्थानीय धार्मिक परंपराओं को नजरअंदाज कर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था बदलना उचित नहीं है। महासभा ने शासन-प्रशासन से स्थानीय परंपराओं को पंडों एवं पूर्वाहितों के हाथों में सौंपने की मांग की है, ताकि धार्मिक परंपरा के साथ राजनीतिक और धर्मनीति का संबंध मर्यादित बना रहे।
रामघाट पर शिप्रा आरती की व्यवस्था को लेकर महाकाल मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों के बीच विवाद पहले से चला आ रहा है। अगस्त में मंदिर समिति द्वारा आरती की व्यवस्था संभालने के बाद पुरोहितों ने इसका विरोध किया था। प्रशासन की ओर से इसे आरती को अधिक भव्य एवं सुव्यवस्थित स्वरूप देने की पहल बताया गया था। मांग नहीं मानी तो देशभर के तीथों तक जाएगा आंदोलन अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन अथवा निवेदन के माध्यम से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को देशभर के तीर्थों तक ले जाया जाएगा। महासभा का दावा है कि उसके साथ करीब 135 तीर्थों के प्रतिनिधि जुड़े हैं। ऐसे में उज्जैन का शिप्रा आरती विवाद अब केवल स्थानीय विषय न रहकर देशभर के तीर्थ पुरोहितों के लिए धार्मिक परंपरा और अधिकारों का मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित रामकृष्ण तिवारी ने शासन प्रशासन से मामले में शीघ्र संज्ञान लेकर तीर्थ पुरोहितों की परंपरागत
पुरोहित महासभा (रजि.) अखिल भारतीय तीर्थ पुरोस्ति
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आयोजक – श्री क्षेत्र पण्डा समिति, उज्जयिनी एवं समस्त पण्डा पुरोहित गण
व्यवस्था और अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग की है। देशभर से तीर्थ पुरोहितों के उज्जैन पहुंचने और धर्मसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने की खबर भी सामने आई है।
तीर्थ पूजन से बैठक की शुरुआत मां शिप्रा का सभी तीर्थ पुरोहितों ने किया पूजन श्री क्षेत्र पंडा समिति एवं उज्जैन तीर्थ के तीर्थ पुरोहितों ने सभी तीर्थ
पुरोहितों का स्वागत किया सरकार ने परंपरा पर हर धर्मिता की तो उज्जैन से शुरू हुई बात दिल्ली तक जाएगी सारे तीर्थ पुरोहितों में आक्रोश कार्य कारिणी की बैठक में सभी ने सरकार को परंपरा का एवं पुरोहितों के सम्मान का ध्यान रखने के लिए आगाह किया। कार्यकारिणी की बैठक में स्वागत सम्मान का संचालन अमर डिब्बे वाले ने किया ओर कार्यकारिणी
की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी इलाहाबाद मुख्य वरिष्ठ महामंत्री पंडित नवीन नगर जी मधुरा दास जी महाराज कानपुर पंडित श्री चंद्रकांत जी शिफोला पंडित श्रीकांत वशिष्ठ हरिद्वार पंडित अरविंद मुरलीधर रामेश्वरम पडित नुनु भाई मिश्र बैजनाथ धाम पंडित नंदकुमार मिश्रा अयोध्या पंडित आशुतोष द्विवेदी बिठूर पंडित अनुज मिश्रा बिठूर पंडित हेरंभ शिखरे त्रंबकेश्वर सहित नैमिषारण्य बनारस कुरुक्षेत्र से आए तीर्थ पुरोहित गानों में अपने विचार व्यक्त कियाद्य उज्जैन की संपूर्ण जानकारी देते हुए सभी तीर्थ पूर्वी के प्रति आभार श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने व्यक्त किया। प्रारंभ में शिप्रा पूजन उज्जैन के सभी युवा तीर्थ पुरोहित गणों द्वारा कराया गया।
अर्थोंनुर्धारित सत्ता के सलाहकारों ने धर्म कि उन परंपराओं का अर्थ का अनर्थ करना प्रारंभ कर दिया धर्म कभी पर्यटन नहीं है सत्ता के लोगों के द्वारा तीर्थाटन को पर्यटन में बदलने की कोशिश की जा रही है धार्मिक परंपरा में पर्यटन को शामिल किया जाएगा तब धार्मिक परंपराओं पर कुठारा घात होगा, मैं हमेशा से कहता आया हूं कि धार्मिक परंपराओं और तीर्थाटन में हस्तक्षेप न किया जाए धार्मिक पर्यटन जैसे शब्दों का तीर्थटन में कोई स्थान नहीं है, हमारी शिप्रा तीर्थाटन का क्षेत्र है उसे पर्यटन का क्षेत्र बनाने की कोशिश ना की जाए, और धार्मिक परंपराओं के साथ छेड़छाड़ किया जाना उचित नहीं है-स्वामी शैलेश आनंद गिरि महाराज महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा
