“सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म”

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संविधान के भाग 3 में समानता के अधिकार की भावना निहित है इसके अनुसार अनुच्छेद 15 में प्रावधान है कि किसी व्यक्ति के साथ जाति ,प्रजाति ,लिंग ,धर्म और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा , 15( 4)के अनुसार यदि राज्य को लगता है कि कोई सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा है, तो राज्य उनके लिए विशेष प्रावधान कर सकता है ,अर्थात भारत के संविधान के अनुसार भारत में रहने वाले व्यक्ति को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े को आरक्षण देने का प्रावधान है ,धर्म और जाति का कहीं जिक्र नहीं है ।लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने अपने वोट की राजनीति के चलते आयोग गठित किए और उनकी सिफारिश का हवाला देकर धर्म और जाति के आधार पर देश के हिंदुओं को जाति के आधार पर बांट दिया।

आज हिंदुस्तान मैं विकास के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चलने की कोई बात नहीं करता ,ये अगड़े तुम, पिछड़े करके ,आरक्षण को ढाल बनाकर एक दूसरे की छाती पर पैर रखते हुए सब आगे निकलने की कोशिश में लगे हैं।

बहरहाल देश में राजनैतिक पार्टीयां हिम्मत दिखाएं एवम राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि मानकर , एक देश एक कानून को लागू करके जातिवाद को समाप्त कर भारत का नागरिक बनाएं ताकि भारत का हर व्यक्ति गर्व से अपनी पहचान के लिए यह कह सके कि” मैं भारतीय हुँ “,हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई में जाति का नामो निशान खत्म हो और हर वर्ग में जो गरीब आर्थिक रुप से कमजोर हो उसे काबिल बनाने के लिए सरकार हर संभव मदद दे ।

“इस प्रकार आरक्षण स्वतः ही खत्म हो जाएगा”।


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