क्या चुनाव ना लड़ पाने की टीस रहेगी ?

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2019 के चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राजनीति में सक्रिय होकर किसका सहारा बनने का प्रयास किया ,कांग्रेस पार्टी की बात करें तो 2014 में कांग्रेस महज 44 सीटों का आंकड़ा ही छु पाई थी ,तो क्या प्रियंका पार्टी का वर्चस्व एवं सीटें बढ़ाने के लिए चुनावी मैदान में आई और अगर ऐसा था भी तो इसमें इतनी देरी का कारण क्या रहा, क्यों विधानसभा चुनाव में प्रियंका एक्टिव नहीं दिखी ,दूसरा अपने भाई एवं पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की मदद के लिए आई?, दरअसल अमेठी में राहुल गांधी की जीत का अंतर लगातार कम दिख रहा था, लेकिन उन्होंने भी एक सैफ सीट का चयन कर लिया , फिर क्या प्रियंका अपनी माता जी सोनिया गांधी की मदद के लिए ,जो कि रायबरेली से चुनाव लड़ रही हैं ,लेकिन वह भी कांग्रेस के लिए सैफ सीट ही कहीं जाती है, इसी के चलते 2019 के चुनाव में सोनिया गांधी कम ही सक्रिय दिखी ,लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि राहुल गांधी ,सोनिया गांधी चुनाव लड़ रहे हैं ,तो प्रियंका वाड्रा का चुनाव नहीं लड़ने का आखिर क्या कारण रहा, ऐसे में मीडिया की ओर से प्रियंका से सवाल किया गया कि क्या आप चुनाव लड़ रही है ,उसको उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया ,लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहेंगी, तो उनका जवाब था कि हां जरूर, लेकिन पार्टी टिकट दे तो, लेकिन अंततः प्रियंका गांधी को टिकट नहीं दिया गया, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके तीन कारण हो सकते हैं, पहला अगर प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हारती तो राजनैतिक कैरियर में पहले चुनाव की पहली हार होती और हार के साथ शुरुआत शायद गांधी परिवार को मान्य नहीं हो ,दूसरा अगर प्रियंका वाराणसी से चुनाव जीतती तो शायद उनके कद के आगे कांग्रेस अध्यक्ष एवं अन्य सभी का कद छोटा महसूस होता और वह प्रधानमंत्री पद की दावेदार हो सकती थी जो कि राहुल गांधी के राजनीतिक कैरियर के लिए प्रश्न चिन्ह हो सकता था, या तीसरा प्रियंका के चुनाव लड़ने की राह में उनके पति राबर्ट वाड्रा रुकावट बने, क्योंकि जमीन घोटाले सहित अन्य केस उन पर चल रहे हैं और कांग्रेस शायद नहीं चाहती कि किसी घोटाले कि आंच पार्टी पर आए, लेकिन तीसरा कारण शायद आज के युग में संभव नहीं है क्योंकि आजकल तो राजनेताओं को जेल से जमानत पर छूटकर भी चुनाव लड़ते देखा हैं ,बहरहाल चुनाव नहीं लड़ने की असली वजह क्या रही यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
चुनाव नहीं लड़ने में बसपा प्रमुख मायावती भी है और गठबंधन की सरकार में प्रधानमंत्री पद की दावेदार भी हो सकती है, लेकिन यूपी में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर हाथी एवं मूर्तियां बनवाई एवं सरकारी पैसे का दुरुपयोग का आरोप उनपर लगा एवं कोर्ट ने उन्हें इन मूर्तियों का पैसा चुकाने को भी कहा ।
तीसरा ममता बनर्जी टीएमसी प्रमुख भी है और मुख्यमंत्री भी, पश्चिम बंगाल में वह अपना किला बचा पाती है या नहीं यह तो 23 को ही मालूम होगा लेकिन 2019 के चुनाव में पूरे भारत में 7 चरणों में से छह चरणों में सबसे विवादास्पद चुनाव कहीं हुए तो वह है पश्चिम बंगाल, जहां अब तक के हर चरण में अराजकता की पराकाष्ठा देखी गई, ममता बनर्जी भी महागठबंधन मैं प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में है।
चुनाव का अंतिम दौर बाकी है और दिल्ली की गद्दी पर राजतिलक किसका होगा यह तो परिणाम तय करेंगे लेकिन चुनाव ना लड़ने की टीस अगर किसी को महसूस होगी तो वह है प्रियंका गांधी वाड्रा, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बिना चुनाव लड़े 10 साल प्रधानमंत्री रहे, ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बड़ी असमंजस की स्थिति होगी कि वह खुद को प्रियंका के आगे रखें या पीछे, प्रियंका का भविष्य कांग्रेस में क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन 2019 के चुनाव में कांग्रेस के दोनों नेताओं का भविष्य दांव पर लगा है वहीं दूसरी ओर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख भी दांव पर लगी है ।
मतदाताओं को अपना मतदाता परिचय पत्र या आधार कार्ड आवश्यक रूप से साथ ले जाकर वोट जरूर करना है, एवं अपनी पसंद की सरकार चुनना है।


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