मनोज की क़लम से,कर्म पर चिंतन…

वाणी के बजाय कार्य से दिए गए उदाहरण कहीं ज्यादा प्रभावी होते हैं। कोरा उपदेश भी तब तक कोई काम नहीं आता जब तक उसे चरितार्थ न किया जाए। वर्तमान समय की एक समस्या यह भी है कि आज की पीढ़ी करने में कम और कहने में ज्यादा विश्वास रखती है। किसी बात को केवल […]