बुझ गया दिया, फैला तिमिर हिन्दोस्तां में, भारत का लाल अरूण ,जब पंचतत्व में हुआ विलीन। बना एक और मित्र अटल का नभ में, एक तरफ मिला साथ सुषमा का ,तो दूसरा जेटली । सुना है सावन में हर तरफ होती है हरियाली , अचानक यह सावन में पतझड़ कैसे हो गया। छूट गया संगी- […]
