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शिप्रा शुद्धिकरण को लेकर अब तक लगभग 3000 करोड रुपए की योजना,फिर भी शिप्रा शुद्ध नहीं, इन योजनाओं में से 538 करोड़ की दो योजना लगभग फेल
100 करोड़ की खान डायवर्सन पाइप लाइन योजना के फेल होने के बाद
टाटा सीवरेज प्रोजेक्ट 2017 में शुरू हुआ 401 करोड़ से 438 करोड़ का हो गया। फिर भी शहर का 100 फीसदी हिस्सा कवर नहीं हो रहा है। अभी 36 वार्ड और 9 वार्ड आंशिक रूप से ही कवर हो पाए हैं, जबकि बचे हुए 9 वार्ड इस प्रोजेक्ट में ही नहीं आ रहे
540 करोड़ रुपये की एक ओर भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन प्रोजेक्ट तैयार हुआ है। प्रोजेक्ट, अमृत मिशन 2.0 अंतर्गत बनाया है, जिसमें शहर के 54 में से शेष 19 वार्डों में 578 किलोमीटर लंबी 200 से 900 मिलीमीटर व्यास की भूमिगत पाइपलाइन बिछाना, प्रदूषित कान्ह नदी के पानी के उपचार के लिए पिपल्याराघौ गांव और उन्हेल चौराहा स्थित साडू माता की बावड़ी के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना प्रस्तावित
1600 करोड रुपए की कान्ह डक्ट परियोजना शुरू की गई है
8 साल में 401 करोड़ का प्रोजेक्ट 438 का हुआ , लगभग 40 करोड रुपए से अधिक का अतिरिक्त भार मध्य प्रदेश की जनता पर पड़ा
40 करोड़ की राजस्व हानी पहुंचाने का जिम्मेदार कौन? उज्जैन नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी या टाटा कंपनी
टाटा कंपनी को टेंडर मिलने पर शहर के ही ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट दे दिया गया, संसाधनों की कमी। बड़े काम के लिए मशीनें लाने में ही महीनों लगे,पेटी कांट्रेक्टरों को पेमेंट नहीं मिला, बड़े काम का अनुभव नहीं था, जिससे वह काम छोड़कर चले गए
40 करोड़ की रिकवरी निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से होगी या टाटा से?
निगम आयुक्त बने कलेक्टर,कलेक्टर बने संभाग आयुक्त, विधायक बने मुख्यमंत्री बावजूद इसके किसी को नहीं गांठ रहा टाटा
निगम में कुछ चुनिंदा अधिकारी जो करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार से लबरेज़ हैं,न कोई जांच ,न कोई कारवाही,बल्कि उन्हें ही करोड़ों के प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी फिर दी जा रही
2023 में टाटा सीवरेज प्रोजेक्ट की फाइव लाइन लीकेज होने से क्षिप्रा नदी में बाढ़ के रूप में गंदा पानी मिला था ,न जांच न करवाही
ऐसे में सवाल यह है कि क्या क्षिप्रा शुद्धिकरण के करोड़ों के प्रोजेक्ट की लुटिया डुबाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सिंहस्थ 2028 के हजारों करोड रुपए के प्रोजेक्ट के समय से ओर गुणवत्ता से पूर्ण करने पर विश्वास किया जा सकता है?
सवाल यह भी है कि इसकी कोई गारंटी देगा कि शिप्रा शुद्धिकरण के अभी अरबों रुपयों के चलने वाले प्रोजेक्ट विफल नहीं होंगे?
यह वीडियो 2023 में टाटा सीवरेज प्रोजेक्ट की पाइपलाइन फूटने का बंसल न्यूज का है, ईश्वर करे इसकी पुनरावृत्ति फिर न हो, और अगर हो तो जनता इसका खामियाजा भुगतने को तैयार रहे।
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दरअसल ब्लैक फंगस बीमारी नई नहीं है ,ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस का संक्रमण नया तो नहीं है, लेकिन फिर भी कोविड-19 (Covid-19) की वजह से इसे नया कहा जा रहा है,इसका पहला मामला 1885 में जर्मनी के पाल्टॉफ नाम के एक पैथोलॉजीस्ट ने देखा था. इसके बाद म्यूकोरमाइकोसिस नाम अमेरिकी पैथोलॉजीस्ट आरडी बेकर ने दिया था. 1943 में इससे संबंधित एक शोध छपा था 1955 में इस बीमारी से बचने वाला पहला शख्स हैरिस नाम का व्यक्ति बताया जाता है. तब से अब तक इसके निदान आदि में ज्यादा बदलाव नहीं आया है।
लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो आरोप लगाया है की ब्लैक फंगस सिर्फ और सिर्फ भारत में ही तेजी से क्यों फैल रहा है ,जानकारों की इस पर अलग-अलग राय है कुछ का मानना है कि ब्लैक फंगस, पानी की खराबी से होता है एवं कुछ का मानना है कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर यह रोग हो सकता है लेकिन बहुतायत जानकारों का मानना है कि ब्लैक फंगस इन दिनों भारत में होने का कारण कोरोना संक्रमण के समय दी जाने वाली ऑक्सीजन के समय दूषित पानी की वजह से होता है ,वहीं कोरोना संक्रमण के इलाज मे दिए जाने वाले स्ट्राइड रेमदेसीविर इंजेक्शन के साइड इफेक्ट को भी वजह माना जा रहा है,
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब रेमदेसीविर इंजेक्शन जिससे कोरोना का इलाज नहीं होना बताया जा रहा है और जिसके इतने गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं तब भारत में यह इंजेक्शन किसकी इजाजत से लगाया जा रहा है ,क्या भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी इजाजत दी है? यह एक जांच का विषय है।
वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उज्जैन में मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 127000 मौतें मध्य प्रदेश में हुई इनमें से 80% कॉविड से हुई,शमशान और कब्रिस्तान में पहुंची लाशों का रिकॉर्ड प्रदेश सरकार सार्वजनिक करें, इंटरनेट पर डाले,रिकॉर्ड सार्वजनिक होते ही जनता खुद तय करेगी कि कौन झूठ बोल रहा, मरनेे वाले को पांच लाख दिए जाएं ,प्रमाण पत्र नहीं उनसे एफिडेविट लिए जाए,
दरअसल कमलनाथ के इस आरोप के पीछे कहा जा रहा है कि जब कोई करोना पॉजिटिव होता है एवं हॉस्पिटल में उसका इलाज चलता है ,एवं कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने पर डिस्चार्ज किया जाता है लेकिन इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर डिस्चार्ज के समय अधिकांश लोगों की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव बताई जा रही है ,जिसके कारण यह संदेह जताया जा रहा है, जो कि एक जांच का विषय है।
बाहर हाल कांग्रेस के दिग्गजों द्वारा लगाए गए केंद्र सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार पर इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं?
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]]>भाजपा अध्यक्ष ग्रामीण बहादुर सिंह बोरमुंडला ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना फैलने से रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं एवं आपदा प्रबंधन की बैठक मैं भी ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण को रोकने के बारे में चर्चा की गई है उन्होंने बताया कि उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह से इस विषय में चर्चा हुई है कि ग्रामीण क्षेत्रों साधारण सर्दी जुखाम मलेरिया टाइफाइड उल्टी दस्त वायरल बुखार आदि में ग्रामीण लोगों को जन स्वास्थ्य रक्षकों द्वारा प्राथमिक उपचार मिलना आवश्यक है अन्यथा कोरोना के अलावा अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में ग्रामीण शहरों की ओर आने पर बाध्य होगा एवं उज्जैन शहर में कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणों के भी कोरोना संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है।
बहादुर सिंह बोर मुंडला ने बताया कि उज्जैन कलेक्टर ने इस संबंध में कहा है कि जल्द ही वह एसडीएम को निर्देशित करेंगे कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे जन स्वास्थ्य रक्षकों को प्राथमिक उपचार करने की छूट दी जाए।
उज्जैन प्रशासन के इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को साधारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में प्राथमिक उपचार ग्रामीण क्षेत्रों में ही जन स्वास्थ्य रक्षकों की मदद से मिल जाएगा एवं गंभीर मरीज ही शहरी क्षेत्र में आ सकेंगे इस तरह ग्रामीण लोगों का शहरी क्षेत्र में ना आने पर कोरोना संक्रमण से भी काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
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]]>The post “क्या अब उज्जैन में धार्मिक त्योहारों के हिसाब से लगेगा लॉकडाउन?” appeared first on Nationalive....
]]>सम्पादकीय
क्या अब उज्जैन में धार्मिक त्योहारों के हिसाब से लगेगा लॉकडाउन?,यह सवाल आज उज्जैन के प्रत्येक नागरिक के मन में है,यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि उज्जैन के जनप्रतिनिधियों के मन में अपनी जनता की धार्मिक भावनाओं का कितना महत्व है, क्या जनता के जनप्रतिनिधि चुनने के बाद जनता की रॉय के कोई मायने नहीं रह जाते,क्या जनता को भरोसे में लेकर जनप्रतिनिधि ओर प्रशासन लॉक डाउन बढ़ाने का फैसला नहीं कर सकते थे, आज जनता लॉक डाउन के फैसले से पूरी तरह कंफ्यूज है, क्योंकि उज्जैन में लॉक डाउन शुक्रवार की शाम से सोमवार की सुबह तक था ,लेकिन इसे एक सप्ताह तक के लिए ओर बढ़ा दिया गया, इसके पीछे का कारण बढ़ता कोरोना है?, इसका कारण उज्जैन के जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की गई विशेष गुजारिश है जिसमें यह कहा गया कि सोमवती अमावस्या ओर हरिद्वार में चल रहे कुंभ के मेले के चलते उज्जैन में अधिक लोगों के आने की संभावना है,अधिक संख्या में लोग उज्जैन में जमा न हो पाएं ,इसलिए उज्जैन में एक सप्ताह का लॉक डाउन किया जाये, ऐसे में प्रश्न यह है कि क्या कोरोना के चलते धार्मिक त्यौहारों पर इस प्रकार प्रतिबंध लगाया जाएगा?,
जनता के मन में यह सवाल घर कर रहा है कि सरकार कोरोना की आड़ लेकर सिर्फ धार्मिक त्योहारों पर ही क्यों प्रतिबंध लगा रही है, आखिर क्यों राजनैतिक आयोजनों ओर चुनाव इससे अछूते हैं ।
बहरहाल उज्जैन के जनप्रतिनिधियों ओर प्रशासन द्वारा धार्मिक त्योहारों पर पूर्ण लॉक डाउन के फैसले को जल्दबाजी में लिया फैसला, जनता के बीच माना जा रहा है, जनता के बीच चर्चा यह भी है कि उज्जैन में विगत दिनों बिना कोरोना के भी शनिचरी अमावस्या पर समुचित व्यवस्था न कर पाने की वजह से कुछ बड़े प्रशासनिक अधिकारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था, तो क्या प्रशासन द्वारा सोमवती अमावस्या पर समुचित व्यवस्था कर पाने में असमर्थता भी लॉक डाउन का कारण तो नहीं, क्योकि इस धार्मिक त्योहार सोमवती अमावस्या पर कोरोना के समय में भी समुचित व्यवस्था कर कुंभ में शाही स्नान किया जा रहा है, तो क्या मध्यप्रदेश सरकार लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए जनता को क्षिप्रा में स्न्नान की व्यवस्था नहीं कर सकती थी?, आखिर उज्जैन के जनप्रतिनिधियों ओर प्रशासन ने सोमवती अमावस्या पर जनता को स्नान कराने में असमर्थता क्यों जताई?,प्रश्न यह कि क्या सोमवती अमावस्या पर क्षिप्रा स्न्नान की कोरोना गाइडलाइन के अनुसार व्यवस्था करने में असमर्थ प्रदेश सरकार है या उज्जैन के जनप्रतिनिधि या प्रशासन?
इस प्रकार के सवाल उज्जैन की जनता आने वाले समय में ओर चुनाव में मौजूदा सरकार से ओर जनप्रतिनिधियों से पूछ सकती है, चूंकि प्रशासन तो सरकार के आदेशानुसार कार्य करता है।
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]]>The post प्रख्यात पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी चौथे स्तंभ पर हमला appeared first on Nationalive....
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]]>The post St. Thomas स्कूल ने ICSE बोर्ड में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन… appeared first on Nationalive....
]]>सेंट थॉमस स्कूल के प्रिंसिपल फादर विजू ने बताया कि 2020 में सेंट थॉमस स्कूल का 100% रिजल्ट रहा, आईसीएसई बोर्ड के सेंट थॉमस स्कूल से 97.4 % अंक लेकर पंशुल व्यास, एवं प्रणवी चौहान टॉपर रहे इसके साथ ही स्कूल से 15 स्टूडेंट ऐसे रहे जिनके अंक 90% से ज्यादा है एवं 47 बच्चों को डिस्टेंशन मिला एवं 34 बच्चे फर्स्ट्ट क्लास से दसवीं कक्षा में उत्तीर्ण हुए।

पंशुल व्यास(97.4)

प्रणवी चौहान(97.40)
सेंट थॉमस स्कूल ने कुछ ही सालों में अपने क्वालिफाइड टीचिंग स्टाफ, अनुशासित वातावरण एवं बच्चों को पढ़ाने के अत्याधुनिक संसाधनों के चलते उज्जैन शहर में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर शीर्षस्थ स्थान अर्जित किया है, स्कूल के प्रिंसिपल फादर बीजू ने बताया कि बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं बल्कि उन्हें व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाना चाहिए जिसके चलते बच्चे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
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]]>The post फैसले पर पुनर्विचार करें प्रशासन अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है… appeared first on Nationalive....
]]>कोरोना संक्रमण लॉकडाउन के पहले अर्थात मई के महीने में मरीजों की संख्या जून की अपेक्षा ज्यादा थी एवं लॉक डाउन खुलने के पश्चात दिन प्रतिदिन कोरोना संक्रमित पॉजिटिव मरीजों की संख्या में अचानक कमी देखी जा रही है और अब प्रशासन ने टेस्टिंग सुविधा भी बढ़ा दी है लेकिन अभी भी शहरों में विभिन्न स्थानों पर कोरोना संक्रमण के मरीज मिल रहे हैं एवं होम क्वॉरेंटाइन एवं कंटेनमेंट क्षेत्र शहर में किए जा रहे हैं।
ऐसे समय में जब मौसम परिवर्तन के कारण से भी लोगों में सर्दी जुकाम खांसी बुखार हो रहा है ,बरसात होने की वजह से भी पानी में खराबी होने से भी लोगों में हर साल इस तरह की परेशानियां हो जाती है ,ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि पानी को साफ एवं उबालकर इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन इन सब परिस्थितियों में परेशानियां यह आ रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सर्दी जुकाम खांसी बुखार जैसी समस्याएं लोगों में देखी जा रही है लेकिन प्रशासन के आदेश अनुसार डॉक्टर विशेषकर एलोपैथिक डॉक्टरों को छोड़कर बाकी सभी पैथी के डॉक्टर इस प्रकार के मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं, सर्दी जुकाम खांसी बुखार के पेशेंट में कोरोना की संभावना के चलते हैं डॉक्टरों द्वारा इलाज न करने का फरमान जारी किया गया है, तब एलोपैथिक डॉक्टर इसका इलाज क्यों कर रहे हैं?, जो डॉक्टर कोरोना संक्रमण काल के दौरान घर में दुबक कर बैठ गए थे और अपने कर्तव्य एवं जनता के साथ धोखा कर रहे थे वे डॉक्टर अब मोटी फीस लेकर सभी प्रकार के मरीजों का इलाज कर रहे हैं जबकि कोरोना संक्रमण का किसी भी पेथी में कोई इलाज कारगर सिद्ध नहीं हुआ है ,ऐसे में एलोपैथिक डॉक्टरों को इलाज करने की छूट क्यों ? जबकि कोरोना का इलाज एलोपैथी से भी संभव नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी डिस्पेंसरी में स्टाफ एवं डॉक्टरों की कमी के चलते कई डिस्पेंसरी या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोग आयुर्वेदिक ,होम्योपैथिक एवं जन स्वास्थ्य रक्षक से अपना प्राथमिक उपचार कराते हैं लेकिन प्रशासन के आदेश अनुसार सर्दी जुकाम खांसी बुखार के मरीजों को ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय प्राथमिक उपचार करने वाले डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे हैं ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को साधारण सर्दी जुकाम खांसी बुखार में भी जिला अस्पताल में आना उनकी मजबूरी हो रही हैं एवं जिला अस्पताल में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों की संख्या बढ़ने से प्रशासन की व्यवस्था अस्त व्यस्त हो सकती है, क्योंकि जिला चिकित्सालय में भी ओपीडी बंद है और अगर इसको चालू भी कर दी जाती है तब भी पूरे जिले ,जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज भी अगर जिला चिकित्सालय में आते हैं तब प्रशासन हजारों सर्दी जुकाम खांसी बुखार के मरीजों का इलाज करने में सक्षम नहीं हो पाएगा।
बाहर हाल ग्रामीण क्षेत्रों में भी मौसम परिवर्तन के कारण से सर्दी जुकाम खांसी बुखार के मरीज बढ़ते जा रहे हैं एवं वे विवश होकर इलाज न मिलने के कारण शहर में आ रहे हैं और ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सर्दी जुकाम खांसी बुखार के इलाज के लिए शहर में आकर कोरोना संक्रमण को साथ में ग्रामीण क्षेत्र में ले जा सकते हैं इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता अभी ग्रामीण क्षेत्र कोरोना संक्रमण से काफी हद तक बचा हुआ है और ऐसे में इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है , इन परिस्थितियों में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्रशासन को अपने आदेश (जिसमें सर्दी जुखाम खांसी बुखार के पेशेंट का इलाज पर प्रतिबंध) पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, एवं स्थानीय डॉक्टरों को प्राथमिक उपचार की अनुमति प्रशासन को देनी चाहिए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का प्राथमिक उपचार ग्रामीण क्षेत्रों में ही हो सके उन्हें शहर आने की आवश्यकता ना हो ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को कोरोना संक्रमण से दूर रखा जा सके, क्योंकि एक बार ग्रामीण क्षेत्रों में अगर कोरोना फैल गया तो प्रशासन को उस परिस्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है इसके लिए प्रशासन को आदेश में संशोधन करने जा सकता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए शहर में आना पड़े।
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]]>सरकार की ओर से कहा गया है कि एक देश एक राशन कार्ड मान्य होगा एवं जहां अब तक गरीबी रेखा वाले पीले राशन कार्ड पर ही राशन दिया जाता था वहीं परिस्थितियों को देखते हुए मध्यमवर्ग की परेशानियों के मद्देनजर सरकार नया निर्णय लिया है कि अब सफेद राशन कार्ड जोकि अमूमन मध्यमवर्गीय के पास होता है एवं सामान्य परिस्थितियों में इस राशन कार्ड पर सरकार की और से दिए जाने वाले राशन का लाभ मिल नहीं मिलता है ,अब कोरोना संक्रमण के कारण लंबे समय का लॉक डाउन होने के कारण मध्यमवर्गीय को भी सफेद राशन कार्ड पर राशन उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है, यहां तक कि सरकार की ओर से कहा गया कि अगर किसी के पास राशन कार्ड नहीं भी है उन्हें भी राशन दिया जाएगा।
लेकिन ऐसी कहावत है कि एक चना भाड़ नहीं पाड़ सकता, सरकार चाहे कितने भी आदेश एवं घोषणा करें लेकिन वास्तविकता में उसका पालन नहीं होता है या यूं कहें कि राज्य सरकार एवं प्रशासन उसका सख्ती से पालन करवाने में असमर्थ साबित होती है।
कुछ ऐसा ही इस घोषणा में भी हो रहा है सरकार ने सभी राशन कार्ड पर राशन देने की बात कही है लेकिन हकीकत में सरकारी राशन दुकानदारों द्वारा सफेद राशन कार्ड पर राशन नहीं दिया जा रहा है और कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार की तरफ से सफेद राशन कार्ड के राशन का आवंटन नहीं हुआ है एवं एक मध्यमवर्गीय जब राशन की दुकान पर राशन लेने पहुंचता है तब उसका मजाक उड़ाया जाता है की आप तो मध्यम वर्गीय हैं, सक्षम है आपको राशन की क्या आवश्यकता है ,आपको यहां राशन लेने नहीं आना चाहिए ,आपको शर्म आनी चाहिए आप किसी गरीब का हक मार रहे हैं इस प्रकार के ताने एक मध्यमवर्गीय को इस को रोना संकट की घड़ी में दिए जा रहे हैं जबकि इस कोरोना संकट से हर वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मध्यमवर्ग की मदद के लिए यह आदेश दिया है लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि राज्य सरकार एवं प्रशासन क्या कर रहा है ?वह सिर्फ और सिर्फ मूकदर्शक बना हुआ है यहां हालात मध्य प्रदेश के उज्जैन नहीं बल्कि भारत के हर राज्य के हर जिले के हैं।
हालात यह है कि कालाबाजारी अपनी चरम सीमा छू रही हैं और हालातों का फायदा उठाकर जमकर लूटपाट मचाई जा रही है, इससे पहले भी सरकारी राशन की दुकानों पर आवंटित राशन ओने पौने दाम में होटलों एवं रेस्टोरेंट में बेचा जाता रहा है एवं सरकारी आंकड़ों में कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं, और ऐसा भी नहीं है कि सरकारी नुमाइंदों को इसका ज्ञान नहीं है लेकिन सब जानकर अनजान बने हुए हैं।
बाहर हाल इस देश की जनता विशेषकर मध्यमवर्ग, मोदी सरकार से यह सवाल पूछना चाहती है कि क्या एक मध्यम वर्गीय जिसे देश की रीड की हड्डी भी कहा जाता है एवं जो अपने स्वाभिमान और देश की आर्थिक व्यवस्था को अपने कंधे पर उठाए हुए हैं, क्या उसका इस महामारी के दौर एवं आर्थिक संकट के दौर में क्या यूं ही सरे बाजार अपमानित किया जाएगा ?और अगर नहीं तो मोदी सरकार अपने सिस्टम में झांक कर देखें कि उनके आदेश का अंतिम छोर तक पालन हो रहा है या नहीं, और अगर इसमें कोई रुकावट है तो उस पर उचित कार्रवाई की जाने की भी आवश्यकता है।
मैं आज बहुत दुखी और व्यथित मन से यह खबर लिख रहा हूं,जब एक मध्यमवर्गीय ने अपनी आप बीती सुनाई,दुःख इस बात का भी है कि 70 सालों की आजादी के बाद अपने खून पसीने से भारत की अर्थव्यवस्था को सींचने वाला मध्यमवर्गीय ,आज भी अपने वजूद को तलाश रहा है, सरकार को इस विषय पर प्राथमिकता से चिन्तन करने की आवश्यकता है।
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]]>The post उज्जैन की जनता करे पुकार,जान बचाने का जतन करो हे शिवराज… appeared first on Nationalive....
]]>आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक डॉ महाडिक का अपने बीमार भाई को इंदौर से उज्जैन लाने एवं कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी उनका इलाज आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में ही किया जाना एवं बाद में पूरे आरडी गार्डी अस्पताल को कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए रिजर्व कर देना एवं शासन के निर्देशों पर 4 करोड रुपए प्रतिमाह पर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को शासन द्वारा अधिग्रहण किया जाना एवं उसके बाद लगातार स्थिति का बिगड़ना यह कुछ ऐसे सवाल है जिसने शासन प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगता है।
नेशनल लाइव ने जब जिला कलेक्टर शशांक मिश्र से आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्थाओं के बारे में सवाल किए और यह प्रश्न उठाया कि लगभग 15 लाख रुपए प्रतिदिन आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज पर खर्च किए जा रहे हैं लेकिन सुविधाओं के नाम पर वहां वेंटिलेटर तक मौजूद नहीं है जबकि वेंटिलेटर के अभाव में बेगम बाग निवासी स्वास्थ्य कर्मी नियाज खान की मृत्यु होने का कारण सामने आया था ,जवाब में कलेक्टर महोदय का कहना है कि कुछ मरीजों की मृत्यु हुई थी लेकिन उन्हें मरणासन्न स्थिति में ही लाया गया था एवं आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर की आवश्यकता अभी महसूस नहीं हो रही है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब वेंटीलेडर की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है तब मरीजों को माधव नगर अस्पताल से भारी भरकम खर्च पर आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में क्यों शिफ्ट किया गया और सवाल यह भी है कि जब शासन ,प्रशासन लाखों रुपए रोज आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों पर खर्च कर रहा है तब मरीजों की जान क्यों नहीं बचा पा रहा है, मृत्यु दर लगातार बढ़ने का क्या कारण है?, उज्जैन की जनता के मन में आक्रोष सहित कई सवाल उत्पन्न हो रहे हैं , पुष्पा मिशन , बिरला हॉस्पिटल , माधव नगर अस्पताल, चरक हॉस्पिटल एवं सीएचएल अपोलो जैसे सर्व सुविधा युक्त अस्पताल होने के बावजूद अव्यवस्था से संपन्न आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को ही क्यों चुना, जनता का आक्रोश जब जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा तब जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से मदद की गुहार लगाई है और उज्जैन के विधायक पारस जैन का कहना है कि अस्पताल में परिवर्तन की आवश्यकता है एवं शासन अरविंदो हॉस्पिटल में भी उज्जैन के कोरोना पॉजिटिव मरीजों को शिफ्ट कर सकता है जबकि चर्चा शहर में यह भी है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज का चयन जनप्रतिनिधियों की सहमति से ही हुआ था, जबकि इलाज में लापरवाही के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।
चर्चा आज यह भी गर्म है कि उज्जैन की तहसील बडनगर जो कोरोनावायरस हॉटस्पॉट बना हुआ है कई लोगों की कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होने के चलते उन्हें बड़नगर में ही अस्पताल में इलाज के लिए रखा गया है एवं कुछ मरीजों की मृत्यु भी हो चुकी है वहीं सुबे के विधायक मुरली मोरवाल सहित अन्य लोगों के भी कोरोना पॉजिटिव होने की खबर आ रही है लेकिन इसमें चर्चा इस बात पर गर्म है कि खुद विधायक भी कोरोना का इलाज उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कराने से बचते नज़र आ रहे हैं उनका कहना है कि बड़नगर के कुछ लोग जो पॉजिटिव थे वे इंदौर में इलाज कराने पर स्वस्थ हो चुके हैं इसलिए उनकी भी मंशा यही है कि वह भी इंदौर में ही स्वास्थ्य लाभ लेंगें, इस चर्चा से स्पष्ट होता है कि अव्यवस्थाओं के चलते मशहूर हो गए आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में खुद जनप्रतिनिधि ही इलाज नहीं कराना चाहते ,तब आम जनता से वहां इलाज कराने की अपेक्षा क्यों की जा रही है, कांग्रेस भी अभी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं ,26 अप्रैल को सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए थे बावजूद दिन प्रतिदिन हालात बिगड़ते ही चले गए हाल ही में उज्जैन के एक नौजवान पार्षद की भी इलाज के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
अब फैसला मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार को करना है की वह अपने मंत्रिमंडल के विस्तार के पूर्व उज्जैन में बढ़ रहे मृत्यु दर की सुध ले ताकि व्यवस्थित अस्पताल में लोगों को शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ हो और इस तरह उज्जैन में कोरोना से हो रहे मृत्यु दर पर रोक लगाई जा सके।
चर्चा यह भी जोरों पर है कि आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर महाडिक जो अपने परिवार को न सिर्फ इंदौर से यहां लेकर आए बल्कि संक्रमण का विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ,इसकी शासन द्वारा जांच कराने की मांग भी जोर पकड़ रही है एवं दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।
उज्जैन की जनता की मांग है कि वक्त रहते हैं शिवराज सरकार उचित कदम उठाएं एवं इस महाकाल की नगरी में हो रहे विनाश पर रोक लगाएं
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